“दर्द को लफ़्ज़ों में लिखूंगी…” 💔

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मैं लिख पाऊँ कुछ तो, ✍️ मैं खुद को लिखूंगी.. 💫 खुद के हिस्से का, दर्द, ग़म सब लिखूंगी.. 💔 वो मायूसी भरे दिन, वो रोती हुई रातें लिखूंगी.. 🌙😢 कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ शिकायतें लिखूंगी.. 🌫️ कुछ शोर अपना, कुछ सन्नाटे लिखूंगी.. 🔕 सबसे दूर, खुद के करीब लिखूंगी.. 🖤 मैं खुद को, बदनसीब लिखूंगी.. 💔 लिखूंगी खुद को खुली किताब में, फिर उस किताब को बेनाम लिखूंगी.. 📖 खामोश लफ़्ज़ों में, अपनी ही आवाज़ लिखूंगी.. 🤍 जो समझ ना पाए कोई, वो हर एहसास लिखूंगी..  जो खो गया रास्तों में, उसे याद बनाकर लिखूंगी.. 🌫️✨ @Soniya_Chouhan

“बे मौसम बरसात सा इश्क़” 🌧️

💖 इश्क़ कुछ यूँ आया ज़िंदगी में उसके आने से,

जैसे बे मौसम बरसात आती है। 🌧️

उसके आने ने वो सुकून दिया जो मिलता है,

जब एक थके-हारे दिन के बाद रात आती है। 🌙✨

और पता है,

साथ यूँ निभाया है उसने कि ऐ खुदा,

मुझे तुम तक आने की कश्ती दी है। ⛵🤲

मोहब्बत तो दे देते हैं कई महबूब,

उसने मुझे मोहब्बत के साथ दोस्ती दी है। 💞🤝

और पता है,

मुझे लगता है मोहब्बत में पाना तो आसान है,

लेकिन मोहब्बत में खुद को खो दो,

तो लगता है जैसे छू लिया आसमान है। ☁️🌈

तो मैंने खोकर भी पाया उसको,

और वो किस्सा मेरी कहानी बन गया। 📖❤️

तुमसे जो भी शिकायतें थीं ऐ खुदा,

वो शुक्र का पानी बन गया। 🙏💧

तो बस, उसके आने ने मेरी रूह को इतना खूबसूरत मोड़ दिया है कि,

अब मेरे दिल ने, मेरी रूह ने, मेरी आत्मा ने,

अकेला महसूस करना छोड़ दिया है। 💕💞


@Soniya Chouhan

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