“दर्द को लफ़्ज़ों में लिखूंगी…” 💔

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मैं लिख पाऊँ कुछ तो, ✍️ मैं खुद को लिखूंगी.. 💫 खुद के हिस्से का, दर्द, ग़म सब लिखूंगी.. 💔 वो मायूसी भरे दिन, वो रोती हुई रातें लिखूंगी.. 🌙😢 कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ शिकायतें लिखूंगी.. 🌫️ कुछ शोर अपना, कुछ सन्नाटे लिखूंगी.. 🔕 सबसे दूर, खुद के करीब लिखूंगी.. 🖤 मैं खुद को, बदनसीब लिखूंगी.. 💔 लिखूंगी खुद को खुली किताब में, फिर उस किताब को बेनाम लिखूंगी.. 📖 खामोश लफ़्ज़ों में, अपनी ही आवाज़ लिखूंगी.. 🤍 जो समझ ना पाए कोई, वो हर एहसास लिखूंगी..  जो खो गया रास्तों में, उसे याद बनाकर लिखूंगी.. 🌫️✨ @Soniya_Chouhan

मैं ऐसी नहीं थी यार, ऐसी बन गई हूँ 😔💫

 मैं ऐसी नहीं थी यार, ऐसी बन गई हूँ 😔💫

जो हँसती थी बेफ़िक्र, अब चुप रह गई हूँ 🤫🌧️


वक़्त ने सिखाया कैसे दिल को पत्थर करना 🕰️💔

हर दर्द पे मुस्कुरा के आगे बढ़ना 🙂🌿


कभी चाहा था कोई समझ ले दिल की बात 💭💞

पर अब खामोशी ही देती है साथ 🤐🌙


जो आँसू कभी टपकते थे गालों पर 💧😢

अब आँखों में ही दम तोड़ते हैं बार-बार 👁️🥀

तकलीफ़ होती है, पर जताती नहीं 😣🖤

दिल में तूफ़ान हैं, पर सुनाती नहीं 🌪️💭


हर ज़ख्म अब जैसे कहानी बन गया है 📖💔

हर दर्द मेरा अब मेरी निशानी बन गया है 💫🩸


लोग कहते हैं — “तू बहुत मज़बूत हो गई” 💬🔥

किसे बताऊँ, ये मज़बूती ही मेरी मज़बूरी हो गई 😶‍🌫️💭


अब किसी से उम्मीद नहीं रखती मैं 🚫🤝

किसी का इंतज़ार नहीं करती मैं ⏳💔


जो टूटी थी कभी, अब संभलना सीख लिया 🌸🕊️

जो खोया था, अब खुद को पाना सीख लिया 🌿✨

कभी-कभी सोचती हूँ, किसी की ज़िंदगी में हूँ भी या नहीं ❔💭

या बस आदत भर बनकर रह गई हूँ कहीं... 🥀💔


हाँ, तकलीफ़ तो आज भी होती है दिल के अंदर 😢❤️‍🩹

पर सहने की आदत हो गई है 💭💪

मैं ऐसी नहीं थी यार, ऐसी बन गई हूँ 😔💫


@Soniya Chouhan



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