“दर्द को लफ़्ज़ों में लिखूंगी…” 💔

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मैं लिख पाऊँ कुछ तो, ✍️ मैं खुद को लिखूंगी.. 💫 खुद के हिस्से का, दर्द, ग़म सब लिखूंगी.. 💔 वो मायूसी भरे दिन, वो रोती हुई रातें लिखूंगी.. 🌙😢 कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ शिकायतें लिखूंगी.. 🌫️ कुछ शोर अपना, कुछ सन्नाटे लिखूंगी.. 🔕 सबसे दूर, खुद के करीब लिखूंगी.. 🖤 मैं खुद को, बदनसीब लिखूंगी.. 💔 लिखूंगी खुद को खुली किताब में, फिर उस किताब को बेनाम लिखूंगी.. 📖 खामोश लफ़्ज़ों में, अपनी ही आवाज़ लिखूंगी.. 🤍 जो समझ ना पाए कोई, वो हर एहसास लिखूंगी..  जो खो गया रास्तों में, उसे याद बनाकर लिखूंगी.. 🌫️✨ @Soniya_Chouhan

Dard Deta Hai Mujhe......!!!

की तू आँसू होता जो मेरी आँख का,
तो तड़प कर बहा देती तुझे,
पर तेरा यू ज़ख़्म बन कर मेरे सीने मैं बैठ जाना ,
दर्द देता है मुझे।
*************

मेरी कहानी का वो अधूरा हिस्सा रहा तू, जिसे पढ़ कर सज़दे किये मेने,
तू लिखी किताब होता तो शायद जला देती तुझे,
पर तेरे लिए मेरी नज़रो से बयाँ हर अल्फ़ाज़ का मेरे सीने मैं बैठ जाना ,
दर्द देता है मुझे।
*************

की ज़िंदगी के सफ़र मैं एक हमसफ़र की आस पर,
जो तू मेरी मंज़िल होता तो शायद छोड़ देती तुझे,
पर तेरा यू रास्ता बनके मेरे सीने मैं बैठ जाना,
दर्द देता है मुझे।
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चाहते तो वापस आ सकते थे तेरी हँसी देख कर,
दूर से दीदार करके आँखों की चमक देख कर,
जो तू सिर्फ एक शख़्स होता तो भुला देती तुझे,
पर हर रोज़ आइने मैं तेरी शख्सियत का दिखना,
दर्द देता है मुझे।
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मुकम्मल नही होगा ये ईश्क़ का कारवां जानती हूं,
पर जाने क्यू तुझ तक पहुँच सकेे हर दुआ मैं वहीं राह माँगती हु,
तू वादा होता तो शायद तोड़ देती तुझे,
पर यू कोशिशें तमाम बन कर तेरा मेरे सीने मैं बैठ जाना ,
दर्द देता है मुझे।
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जाने क्यों थम सा गया वक़्त हर बार तेरे दीदार से,
जाने क्यों मेने न चूना कोई गुलिस्तां तेरे अलावा मौसम-ए-बहार से,
जो तू वक़्त होता तो शायद भुला देती तुझे,
पर तेरा यू लम्हा बन कर मेरे सीने मैं बैठ जाना ,
दर्द देता है मुझे।
*************

तेरी हसरतों को छोड़ दू तो खुद बिखर जाऊ,
ए मोहब्बत के मसीहा मैं किधर जाऊ,
जो तू उम्मीद होता तो शायद तोड़ देती तुझे,
पर तेरा यू सबर बनके मेरे सीने मैं बैठ जाना ,
दर्द देता है मुझे।
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